इंदौर: मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी और देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर से एक विचलित करने वाली घटना सामने आई है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में पाइपलाइन के जरिए दूषित पानी की आपूर्ति होने से अब तक कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 40 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हैं। इस गंभीर लापरवाही पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और नगर निगम को नोटिस जारी किया है।
भागीरथपुरा में मातम: शिकायतों को किया गया अनसुना
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से नलों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा था। इसकी शिकायत कई बार स्थानीय पार्षदों और नगर निगम के अधिकारियों से की गई थी, लेकिन प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। देखते ही देखते इलाके में उल्टी, दस्त और पेट दर्द के मरीज बढ़ने लगे। जब तक प्रशासन जागा, तब तक सात जिंदगियां दम तोड़ चुकी थीं। वर्तमान में प्रभावितों का इलाज शहर के एम.वाय. अस्पताल (MY Hospital) और अन्य निजी क्लीनिकों में चल रहा है।
NHRC का कड़ा रुख और नोटिस
मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए, NHRC ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और इंदौर नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा कि "साफ पीने का पानी नागरिकों का बुनियादी संवैधानिक अधिकार है। यदि प्रशासन की लापरवाही के कारण लोगों की जान जा रही है, तो यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।" आयोग ने यह भी पूछा है कि क्या पीड़ित परिवारों को कोई आर्थिक सहायता प्रदान की गई है और दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई है।
प्रशासनिक जांच और सुधार के दावे
हादसे के बाद प्रशासन ने इलाके में पानी की आपूर्ति बंद कर दी है और टैंकरों के जरिए पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सीवरेज की लाइन और पीने के पानी की पाइपलाइन आपस में मिल गई थीं (Cross-contamination), जिससे पानी जहरीला हो गया। इंदौर के जिला कलेक्टर ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और संबंधित इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में मेडिकल कैंप लगाया है ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके।
स्वच्छता के दावों पर सवालिया निशान
इंदौर लगातार कई वर्षों से 'स्वच्छता सर्वेक्षण' में नंबर-1 रहा है, लेकिन इस घटना ने बुनियादी ढांचों के रख-रखाव पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत कर दी जाती, तो इन मासूमों की जान बचाई जा सकती थी। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि केवल कागजों पर स्वच्छता दिखाने के बजाय जमीनी स्तर पर सीवरेज और जल प्रबंधन प्रणाली को दुरुस्त किया जाना चाहिए।